मै राजीव कुमार रंजन एक साधारण दिखने वाला व्यक्ति हूँ। लेकिन विरासत ने बहुत कुछ छोड़ रखा है, जिसके वजह से अपने जमीन से जुड़ा हुआ हूँ। हमारा परिवार 70 वर्षों से अपने गाँव के मुखिया पद पर रह चुके है। मै इस घर का सबसे छोटा लड़का हूँ। मेरा बचपन इन समाजों में और बाकि पढाई-लिखाई शहरों में हुआ। हमारे परिवार पर सामाजिक जिम्मेदारी होने की वजह से मै हमेशा अपने समाज से जुड़ा रहा और मैंने अपने समाज को बहुत नजदीक से देखा है। साथ ही अपने परिवार और समाज से बहुत कुछ सिखा है। जो मुझे बार-बार समाज के ओर दिखने को मजबूर करता है। जो समाज में समानता चाहता है। मै जानता हूँ की यह कोशिश इतनी जल्दी समाज पर असर नहीं करेगा लेकिन आज एक व्यक्ति समाज के लिए आगे बढेगा तो काल जरुर दस आगे बढेंगे क्योंकि कोशिश करने वाला व्यक्ति को हमेशा सफलता मिलती है। लेकिन उस व्यक्ति का मकसद साफ और समाज के लिए हो, अपने जीत के लिए नहीं समाज के जीत के लिए होनी चाहिए।

2010, बिहार विधानसभा चुनाव। शायद, मेरे जीवन का बहुत बड़ा निर्णय था। जिसमे मैंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। इसके पीछे राजनीतिक सत्ता को प्राप्त करने का कोई इरादा या लालच नहीं था। इस चुनाव को लड़ने का सिर्फ दो मकसद था। समाज के लोगों में राजनीती के प्रति गन्दी सोंच में वदलाव लाना और सही व्यक्ति का चुनाव करना। दूसरी युवा शक्ति को बढ़ावा देना। उसको सामाजिक और राजनीतिक के प्लेटफोर्म पर उतारना। इसके के लिए किसी एक आगे बढ़ना जरुरी था। जिससे युवा आगे बढ़ सके या उसके काबिल समझ सके। समाज के बहुत राजनीतिक सोंच रखने वाले व्यक्ति और मेरे परिवार के लोग भी मेरे इस फैसले से तेयार नहीं थे। कहने वाले यहाँ तक कह दिए की मै बच्चा और पागल हूँ। उस समय मै पुरे विधानसभा में सबसे कम उम्र का उम्मीदवार था। लेकिन मै अपने होसले को मजबूत रखा और चुनाव लड़ा। इसमे मेरे पिता जी यानि श्री जयनंदन कुमार जिन्होंने अपने गाँव के पंचायत में 20 सालों तक मुखिया पद पर रह चुके है। उनका होसला मेरे लिए काफी मजबूत था। मेरा साथ भी दिए।

विधानसभा का इलाका बहुत बड़ा होता है। चुनाव प्रचार में, मैंने सिर्फ चार दिनों का समय दिया। समाज के लोगों के चेहरों को पढ़ा और अपने पोस्टर, बैनर और हैण्ड पेपर के जरिये अपनी बात समाज के लोगों तक पहुचाया। चुनाव परिणाम में मेरा सातवां स्थान आया। जो समाज के लोगों को आश्चर्य चकित कर दिया। चार दिन का समय और मामूली पैसा खर्च करके इतना वोट लाना मामूली बात नहीं है। विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद ग्राम पंचायत चुनाव होने वाला था। और हमारा सारा ध्यान ग्राम पंचायत चुनाव पर था। क्योंकि मै जनता था की मेरे इस होसले की वजह से युवा पीढ़ी आगे बढेगा। पंचायत चुनाव में एक नया तस्वीर निकल कर सामने आया। मुखिया, सरपंच, वार्ड मेम्बर लेकर जिला परिषद के उम्मीदवार पद पर चुनाव लड़ने वालों में युवा का काफी चेहरा था। शायद, इसमे जीत कुछ ही युवा का हुआ होगा। लेकिन समाज के सामने तो आया। जिसे देखकर काफी खुश हुआ।

नया भारत बनाने के लिए नया तस्वीर होना बहुत जरुरी है। जिसका शुरुआत भारत के ग्रामीण पृष्ठभूमि से होना बहुत जरुरी है। जिस तरह एक पेड़ जमीन पर खड़ा है। उसी तरह भारत भी गाँवों पर खड़ा है। हम सभी को इस बात को समझना जरुरी है। इसलिए यहाँ के लोगों में वदलाव जरुरी है। इसी के सहारे अपने भारत को मजबूत और शक्तिशाली बना सकते है। HOME